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| एलपीजी की कमी के बीच सरकार ने केरोसीन उपलब्ध कराने की बात कही, लेकिन वितरण व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। |
नई दिल्ली: देश में एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर केरोसीन (मिट्टी का तेल) उपलब्ध कराने की बात कही है। सरकार का कहना है कि खाना बनाने और रोशनी के लिए 48 हजार लीटर से अधिक केरोसीन का इंतज़ाम किया गया है। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह केरोसीन लोगों तक पहुंचाया कैसे जाएगा।
गैस की कमी को लेकर बढ़ी चिंता
हाल के दिनों में एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई को लेकर कई राज्यों से शिकायतें सामने आई हैं। सोशल मीडिया पर भी ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं जिनमें लोग गैस की कमी की बात करते दिखाई दे रहे हैं।सरकार का कहना है कि सिलेंडर की कमी का एक कारण लोगों द्वारा घबराहट में अधिक बुकिंग करना भी है।
वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर केरोसीन
सरकार के अनुसार एलपीजी की कमी से निपटने के लिए केरोसीन को वैकल्पिक ईंधन के रूप में उपलब्ध कराया जा सकता है। इसके लिए हजारों लीटर मिट्टी के तेल की व्यवस्था की गई है, ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को राहत मिल सके।यह भी पढे:
वितरण व्यवस्था को लेकर सवाल
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केरोसीन का वितरण आसान नहीं होगा। दरअसल पिछले कुछ वर्षों में देश के कई राज्यों में केरोसीन वितरण व्यवस्था लगभग खत्म हो चुकी है।2017 से 2020 के बीच कई राज्यों में केरोसीन की सरकारी आपूर्ति धीरे-धीरे बंद कर दी गई थी, क्योंकि उस समय एलपीजी को बढ़ावा देने की नीति अपनाई गई थी।
डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क लगभग खत्म
केरोसीन का वितरण पहले सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से किया जाता था। लेकिन एलपीजी के बढ़ते उपयोग के बाद यह व्यवस्था कई जगह बंद हो गई।ऐसे में अब अगर सरकार केरोसीन उपलब्ध कराना चाहती है तो उसके लिए नई वितरण व्यवस्था तैयार करनी पड़ सकती है।
विशेषज्ञों की राय
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि अगर एलपीजी की आपूर्ति सामान्य नहीं होती तो सरकार को वैकल्पिक ईंधन की व्यवस्था करनी ही होगी। हालांकि इसके लिए मजबूत सप्लाई चेन और वितरण प्रणाली बनाना भी जरूरी होगा।लोगों की चिंता बनी हुई
गैस की सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण आम लोगों में चिंता बनी हुई है। कई जगहों पर लोग समय पर सिलेंडर मिलने को लेकर सवाल उठा रहे हैं।सरकार का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सप्लाई सामान्य करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।


